अपठित गद्यांश
अपठित का शाब्दिक अर्थ है -- जो पढ़ा नहीं गया -- जो पाठ्यक्रम से जुड़ा हुआ नहीं है और जो अचानक ही पढ़ने के लिए दिया गया हो। इसमें गद्यांश से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देने को कहा जाता है। इस प्रकार इस विषय में यह अपेक्षा की जाती है कि पाठक द्वारा दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर उसी अनुच्छेद के आधार पर संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें। प्रश्नों के उत्तर पाठक को अपनी भाषा शैली में देने होते है।
अपठित गद्यांश के द्वारा पाठक की व्यक्तिगत योग्यता और अभिव्यक्ति की क्षमता का आकलन किया जाता है। अपठित का कोई क्षेत्र विशेष नहीं होता। विज्ञान कला साहित्य नागरिक शास्त्र या किसी भी विषय के उत्तर देने से मानसिक स्तर बढ़ता है और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ाता है।
अपठित गद्यांश को हल करने की विधि और विशेषताएं
- अपठित गद्यांश को बहुत ध्यान पूर्वक मन ही मन में दो बार पढ़ना चाहिए।
- गद्यांश को पढ़ते समय विशेष स्थानों को रेखांकित करना चाहिए।
- अपठित गद्यांश के प्रश्नों के उत्तर देते समय भाषा सरल व्यवहारिक और सहज होनी चाहिए।
- अपठित गद्यांश से संबंधित किसी भी प्रश्न का उत्तर देते समय कम से कम शब्दों में अपने उत्तर को स्पष्ट करना चाहिए।
- शीर्षक लिखते समय संक्षिप्तता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
अपठित गद्यांश 1
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
एक बार एक किसान का बैल गहरे गड्ढे में गिर गया । वह जोर जोर से चिल्लाने लगा । किसान उसे बहार निकलने का उपाए सोचने लगा । अंत में उसने निर्णय लिया की बैल काफी बूढ़ा हो चूका है, इस लिए उसे गड्ढे में ही दफना देना चाहिए । किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी मिलकर गड्ढे में मिट्टी डालने लगे । जैसे ही बैल को सब समझ में आया, वह और जोर जोर से चिल्लाने लगा और फिर अचानक शांत हो गया ।
सब लोग चुपचाप गड्ढे में मिट्टी डालते जा रहे थे । तभी किसान ने नीचे झांककर देखा तो वह चकित रहे गया । अपनी पीठ पर पड़ने वाली मिट्टी को वह बूढ़ा हिला हिलाकर नीचे गिरा देता था और उस मिट्टी पर चढ़ जाता था । जल्दी ही वह गड्ढे के किनारे तक पहुंच गया और फिर अपनी हिम्मत और सूझ बुझ के बल पर बहार आने में सफल हो गया ।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :
- किसान का बैल कहा गिर गया।
- बैल का चिल्लाना सुन कर किसान से क्या निर्णय लिया?
- किसान के पड़ोसियों ने उसकी मदद किस प्रकार की?
- किसान चकित क्यों रह गया?
- गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर:
- किसान का बैल गहरे गड्ढे में गिर गया।
- बैल का चिल्लाना सुनकर किसान से यह निर्णय लिया की बैल काफी बूढ़ा हो चूका है, इसलिए उसे गड्ढे में ही दफना देना चाहिए।
- किसान के पड़ोसियों ने मिलकर गड्ढे में मिट्टी डालकर उसकी मदद की।
- किसान चकित इसलिए रह गया, क्योकि उसने देखा की बैल अपनी सूझ बुझ और हिम्मत से गड्ढे से बहार निकलने में सफल हो गया था।
- सफलता
अपठित गद्यांश 2
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
पेंसिल की कहानी बहुत पुरानी नहीं है। करीब छ: सौ वर्ष पहले जर्मनी में ग्रैफाइट की चट्टानें मिली । इनका कोई टुकड़ा लेकर कागज या पत्थर पर लिखा जाता, तो निशान या लकीरे बन जाती । इसके कोई डेढ़ सौ साल बाद इंग्लैंड में शुद्ध ग्रैफाइट की चट्टान मिली । पहले गड़रियो को इनका पता चला । वे ग्रैफाइट की चट्टान का टुकड़ा लेकर अपनी भेड़ो पर निशान लगा देते । इससे उन भेड़ो की अलग से पहचान हो जाती थी ।
फ़्रांस के निकोलस जेटकांते और ऑस्ट्रेलिया के जोसफ हडथरमुथ ने सबसे पहले पेंसिल बनाने में कामयाबी हांसिल की । अब तो इतनी सुन्दर पेंसिल बनती है कि बच्चे उन्हें पाने के लिए मचल उठते है । अब पेंसिल पर सुन्दर सुन्दर बच्चो के हसते खेलते चित्र होते है । कुछ पर पक्षीयो और जानवरो के भी चित्र होते है । वे इतनी रंग बिरंगी होती है कि उन्हें हाथ में लिए बगैर चैन ही नहीं पड़ता ।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :
- करीब छः सौ वर्ष पहले जर्मनी में किसकी चट्टानें मिली?
- ग्रैफाइट के टुकड़े से कागज या पत्थर पर लिखने से क्या बन जाता है?
- ग्रैफाइट की शुद्ध चट्टानें सबसे पहले कहाँ मिली?
- गडरिये ग्रैफाइट से क्या करते थे?
- सबसे पहले पेंसिल बनाने में किसने कामयाबी हासिल की?
उत्तर:
- जर्मनी में छ: सौ वर्ष पहले ग्रीफाइड की चट्टानें मिली थी।
- ग्रीफाइड के टुकड़े से कागज या पत्थर पर लिखने से लकीरें बन जाती थी।
- ग्रैफाइट की शुद्ध चट्टान सबसे पहले इंग्लैंड में मिली।
- गडरिये ग्रैफाइट के टुकड़े से भेड़ो पर निशान लगते थे।
- सबसे पहले फ़्रांस के निकोलस जेटकांते और ऑस्ट्रेलिया के जोसफ हडथरमुथ पेंसिल बनाने में सफल हुए ।
अपठित गद्यांश 3
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
एक गधा जंगल में घास चर रहा था । जंगल के किनारे पर ही उसके मालिक हरिया का घर था। वह रोज जंगल में आकर घास खाकर उसे बड़ा ही मजा आता था । उसे वहाँ कभी भी कोई खतरा महसूस नहीं हुआ । मगर एक दिन अचानक ही उसे पास की झाड़ियों में सरसराहट सुनाई दी । उसने सर उठाकर देखा तो उसके प्राण सुख गए । झाड़ियों से निकलकर एक बाघ उसके सामने आ खड़ा हुआ था । गधे ने सोचा कि आज तो मारे गए । मगर आदमियों की संगत में रहकर वह भी बहुत चालाक हो गया था । उसने डरना छोड़ और लंगड़ा लगडकर चलने लगा ।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :-
- गधा जंगल में क्या कर रहा था ?
- जंगल के किनारे किसका घर था ?
- अचानक ही एक दिन गधे के सामने कौन आकर खड़ा हो गया ?
- निम्नलिखित शब्दों के लिंग बदल कर लिखिए -- (a) मालिक (b) बाघ
- गद्यांश में से दो विशेषण शब्द छांटकर लिखिए ।
उत्तर:
- गधा जंगल में घास खा रहा था ।
- जंगल के किनारे हरिया का घर था ।
- अचानक ही उसके सामने एक बाघ आकर खड़ा हो गया ।
- (a) मालकिन (b) बाघिन
- (a) हरी-हरी (b) चालाक
अपठित गद्यांश 4
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम दूबे और माता का नाम हुलसी था। इनका विवाह दीनबंधु पाठक की कन्या रत्नावली से हुआ था। तुलसीदास द्वारा रचित बारह ग्रंथ प्रामाणिक माने गए हैं। दोहावली, कवितावली, गीतावली, रामचरितमानस, रामाज्ञाप्रश्न, विनयपत्रिका, रामललानहछ, वैराग्य संदीपनी और श्रीकृष्णगीतावली। प्रबंध सौष्ठव, चरित्र चित्रण, प्रकृति वर्णन अलंकार विधान, भाषा और छंदप्रयोग की दृष्टि से गोस्वामी जी अद्वितीय हैं। तुलसीदास ने ब्रजभाषा और अवधी दोनों भाषाओं में लिख है।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :-
- गोस्वामी तुलसीदास के पिता और माता का नाम क्या था?
- गोस्वामी तुलसीदास का विवाह किससे हुआ?
- तुलसीदास द्वारा रचित कुछ ग्रंथों के नाम लिखें?
- किन दृष्टियों से गोस्वामी जी अद्वितीय हैं?
- तुलसीदास की काव्यभाषा क्या हैं?
उत्तर:
- गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम दूबे और माता का नाम हुलसी थी ।
- इनका विवाह दीनबंधु पाठक की कन्या रत्नावली से हुआ था ।
- तुलसीदास द्वारा रचित बारह ग्रंथ प्रामाणिक माने गए हैं । दोहावली, कवितावली, गीतावली, रामचरितमानस, रामाज्ञाप्रंशन, विनयपत्रिका, रामललानहछू, पार्वतीमंगल, जानकी मंगल, बरवैरामायण, वैराग्य संदीपनी और श्रीकृष्णगीतावली ।
- प्रबंध सौष्ठव, चरित्र चित्रण, प्रकृति वर्णन, अलंकार विधान, अलंकार विधान, भाषा और छतदप्रयोग की दृष्टि से गोस्वामी जी अद्वितीय हैं ।
- तुलसीदास ने ब्रजभाषा और अवधी दोनों भाषाओं में लिखा है।
अपठित गद्यांश 5
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
शिक्षा का कार्य है कि वह संपूर्ण जीवन की प्रक्रिया को समझने में हमारी सहायता करें, न कि हमें केवल कुछ व्यवसाय या ऊँची नौकरी के योग्य बनाए। मेधा वह शक्ति है जिससे हम भय और सिद्धांतों की अनुपस्थिति में स्वतंत्रता केसाथ सोचते हैं ताकि हम अपने लिए सत्य की, वास्तविकता की खोज कर सकें। बचपन से ही हमें एक ऐसे वातावरण में रहना अत्यंत आवश्यक है जो स्वतंत्रतापूर्ण हो। साधारणतया सुरक्षा में जीने का अर्थ है अनुकरण में जीना अर्थात भय में जीना। हम यदि भयभीत हैं, तब हम न तो खोज कर सकते हैं, न निरीक्षण कर सकतें हैं, न सीख सकते हैं और न गहराई से जागरूक ही रह सकतें हैं।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :-
- शिक्षा का क्या कार्य है?
- मेधा कैसी शक्ति है?
- बचपन से ही हमें किस तरह के वातावरण में रहना अत्यंत आवश्यक है?
- सुरक्षा में जीनें का क्या अर्थ है?
- हम यदि भयभीत हैं तो क्या नहीं कर सकते हैं?
उत्तर:
- शिक्षा का कार्य है कि वह संपूर्ण जीवन की प्रक्रिया को समझने में हमारी सहायता करें, न कि हमें केवल कुछ व्यवसाय या ऊँची नौकरी के योग्य बनाए ।
- मेधा वह शक्ति है जिससे हम भय और सिद्धांतों की अनुपस्थिति में स्वतंत्रता के साथ सोचते हैं ताकि हम अपने लिए सत्य की, वास्तविकता की खोज कर सके ।
- बचपन से ही हमें एक ऐसे वातावरण में रहना अत्यन्त आवश्यक है जो स्वतंत्रतापूर्ण हो ।
- साधारणतया सुरक्षा में जीने का अर्थ है अनुकरण में जीना अर्थात् भय में जीना ।
- हम यदि भयभीत हैं, तब हम न तो खोज कर सकते हैं, न निरीक्षण कर सकते हैं, न सीख सकते हैं और न गहराई से जागरूक ही रह सकते हैं ।
अपठित गद्यांश 6
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
बुद्ध और महावीर ने कृपा करके नारियों को भी भिक्षुणी होने का अधिकार दिया था। जैनों के बीच जब दिगंबर संप्रदाय निकला, तब धर्माचार्यों ने धर्म. पुस्तक में एक नए नियम का विधान किया कि नारियों का भिक्षुणी होना व्यर्थ है, क्योंकि मोक्ष नारी जीवन में नहीं मिल सकता। बुद्ध ने भी एक दिन आयुष्मान आनंद से ईषत् पश्चाताप के साथ कहा कि "आनंद। मैंने जो धर्म चलाया था, वह पाँच सहस्त्र वर्ष तक चलने वाला था, किंतु अब वह केवल पाँच सौ वर्ष चलेगा, क्योंकि नारियों को मेंने भिक्षुणी होने का अधिकार दे दिया है।" धर्म साधक महात्मा और साधु नारियों से भय खाते थे। नारी की पद-मर्यादा प्रवृत्तिमार्ग के प्रचार से उठती और निवृत्तिमार्ग के प्रचार से गिरती रही है।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :-
- बुद्ध और महावीर ने नारियों को क्या दिया था?
- दिगंबर संप्रदाय ने धर्म-पुस्तक में किस नियम का विधान किया?
- बुद्ध ने किससे ईषत् पश्चाताप कं साथ कहा?
- नारियों से कौन भय खाते थे?
- नारी की पद-मर्यादा कब उठती और गिरती रही है?
उत्तर:
- बुद्ध और महावीर ने कृपा करके नारियों को भी भिक्षुणी होने का अधिकार दिया था ।
- जैनों के बीच जब दिगंबर संप्रदाय निकला, तब घधर्माचार्यों ने धर्म-पुस्तक में एक नए नियम का विधान किया कि नारियों का भिक्षुणी होना व्यर्थ है क्योंकि मोक्ष नारी जीवन में नहीं मिल सकता ।
- बुद्ध नेभी एक दिन आयुष्मान आनंद से ईषत् पश्चातापक॑ साथ कहा कि "आनंद ! मैंने जो-धर्म चलाया था, वह पाँच सहस्र वर्ष तक चलने वाला था किन्तु अब वह केबल पाँच सौ वर्ष चलोग क्योंकि नारियों को मेैंनं भिक्षुणी होने का अधिकार दे दिया है ।"
- धर्म साधक महात्मा और साधु नारियों सेभय खाते थे।
- नारी की पद-मर्यादा 'प्रवृत्तिमार्ग के प्रचार से उठती और निवृिमगार्ग कके प्रचर से गिरती रही है।
अपठित गद्यांश 7
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
भितिहरवा गाँव अमोलवा के निकट है जहाँ सन् 17 में एमन साहब की तूती बोलती थी। गाँधीजी ने चंपारण के तीन गाँवों में आश्रम विद्यालय स्थापित किए-बड़हरवा, मधुबन और मभितिहरवा। बड़हरवा का विद्यालय विदेश से शिक्षाप्राप्त इंजीनियर श्री बवनजी गोखले और अनकी विदुषी पत्नी अवंतिकाबाई गोखले ने चलाया। मधुबन में गाँधीजी ने गुजरात से नरहरिदास पारिख और उनकी पत्नी तथा अपने सेक्रेटरी महादेव देसाई को भेजा। कुछ दिन आचार्य कृपलानी भी वहाँ रहे। भितिहरवा के अध्यक्ष थे वयोवृद्ध डॉक्टर देव और सोमन जी। बाद में वहाँ पुंडलीक जी गए। स्वयं कस्तूरबा भितिहरवा आश्रम में रहीं और इन कर्मठ और विद्वान स्वयंसेवकों की देखभाल करती रहीं।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :-
- मभितिहरवा गाँव कहाँ है?
- गाँधीजी ने चंपारण में कहाँ. कहाँ आश्रम विद्यालय स्थापित किए?
- बड़हरवा का विद्यालय किसने चलाया?
- मधुबन में गाँधीजी ने गुजरात से किनको भेजा?
- कस्तूरबा भितिहरवा आश्रम में क्या करती रहीं?
उत्तर:
- भितिहरवा गाँव, अमोलवा के निकट है जहाँ सन् 17 में एमन साहब को तूती बालती थी ।
- गाँधीजी ने चंपारण के तीन गाँवों में आश्रम विद्यालय स्थापित किए-बड़हरवा, मधुबन और भितिहरवा ।
- बड़हरवा का विद्यालय विदेश से शिक्षाप्राप्त इंजीनियर श्री बबनजी गोखले और अनकी विदुषी पत्नी अर्वतिकाबाई गोखले ने चलाया ।
- मधुबन में गाँधीजी ने गुजरात ने नरहरिदास पारिख और उनकी पत्नी तथा अपने सेक्रेटरी महादेव देसाई को भेजा । कुछ दिन आचार्य कृपलानी भी वहाँ रहे । भितिहरवा के अध्यक्ष थे वयोवृद्ध डॉक्टर देव और सोमन जी । बाद में वहाँ पुंडलीक जी गए । स्वयं
- कस्तूरबा भितिहरवा आश्रम में रहीं और इन कर्मठ और विद्वान स्वयंसेवकों की देखभाल करंती रही ।
अपठित गद्यांश 8
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्नों का उत्तर दें :
एक बार की बात है, एक अमीर युवा राजा था, जो हमेशा बीमार होने से डरता था। उन्होंने हमेशा अपने महल के दरवाजे और खिड़कियां कसकर बंद रखीं और कभी बाहर नहीं गए। फिर भी उसे सर्दी पकड़ता रहा और बुखार होता रहा। एक दिन उन्होंने अपने मंत्री से कहा, "मुझे आश्चर्य है कि मैं इतना कमजोर क्यों हूं? क्या आप मुझे यह समझा सकते हैं?" मंत्री ने उत्तर दिया, "बहुत सावधानी बरतने से बेहतर है कि कोई सावधानी न बरती जाए।
" एक दिन मंत्री ने राजा को टहलने के लिए मजबूर किया और उसे एक चरवाहे के पास ले गया जो पहाड़ी पर बैठा था और अपनी भेड़ों को देख रहा था। चरवाहा बहुत गरीब था, उसके पास बहुत कम कपड़े और जूते नहीं थे।
राजा ने चरवाहे से पूछा, "क्या आपको कभी सर्दी या बुखार नहीं होती है?" चरवाहे ने जवाब दिया -- मुझे कभी सर्दी या बुखार नहीं होती है। मैं बचपन से ही खुली हवा में रहता हूं और रात भर बाहर रहता हूं "।
अपठित गद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नो के उत्तर दीजिये :-
- राजा ने सभी दरवाजे और खिड़कियां क्यों बंद कर दीं?
- वह इतनी बार बीमार क्यों पड़ा?
- हमें कैसे पता चला कि चरवाहा गरीब था?
- चरवाहे को क्या स्वस्थ रखा गया?
-
उपरोक्त कहानी में कौन-
- कोई ध्यान नहीं रखा?
- बहुत सावधान था?
उत्तर:
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